नई दिल्ली, 23 सितंबर 2026। अनुसूचित जाति समुदाय से आने वाले 30 वर्षीय सागर कोडी की कहानी उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो आर्थिक और भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना देखते हैं। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले सागर के लिए उच्च शिक्षा हासिल करना आसान नहीं था, लेकिन छात्रवृत्ति और फेलोशिप के सहयोग ने उनकी शैक्षणिक यात्रा को नई दिशा दी। सागर के लिए पढ़ाई केवल व्यक्तिगत उपलब्धि हासिल करने का माध्यम नहीं थी। वह अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और अपने समुदाय के विकास में योगदान देने के उद्देश्य से भी उच्च शिक्षा हासिल करना चाहते थे। स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी करने के बाद सागर ने यूजीसी-नेट जूनियर रिसर्च फेलोशिप हासिल करने का प्रयास किया। हालांकि, वह दो प्रतिशत से भी कम अंकों के अंतर से इस फेलोशिप को हासिल करने से चूक गए। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी शैक्षणिक यात्रा जारी रखी। उन्होंने विश्वविद्यालय के पीएचडी कार्यक्रम में दाखिला लिया, जहां उन्हें सीमित वित्तीय सहायता भी प्राप्त हुई। हालांकि, यह सहायता शोध से जुड़े खर्चों और परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं थी। सागर के परिवार को उम्मीद थी कि वह स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी शुरू करेंगे और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में योगदान देंगे। ऐसे में डॉक्टरेट की पढ़ाई के दौरान आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता गया। इसी दौर में अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध राष्ट्रीय फेलोशिप योजना (NFSC) उनके लिए महत्वपूर्ण सहारा बनी। सागर को 27 दिसंबर 2019 से 15 मई 2024 तक जूनियर रिसर्च फेलोशिप और सीनियर रिसर्च फेलोशिप के माध्यम से आर्थिक सहायता मिली। उन्हें मिलने वाली अंतिम फेलोशिप राशि 42 हजार रुपये थी। फेलोशिप मिलने के बाद सागर के लिए आर्थिक अनिश्चितता काफी हद तक कम हुई और वह अपना शोध कार्य जारी रख सके। इस सहायता से उन्हें शोध और शैक्षणिक खर्चों को पूरा करने के साथ-साथ परिवार की जरूरतों में भी योगदान देने में मदद मिली। सागर के अनुसार, यदि उन्हें इस फेलोशिप योजना के तहत आर्थिक सहायता नहीं मिलती, तो उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह डॉक्टरेट की पढ़ाई जारी रख पाते। आर्थिक चुनौतियों और परिस्थितियों के बावजूद सागर ने अपनी मेहनत जारी रखी और पीएचडी पूरी की। इसके बाद उन्होंने शोध के क्षेत्र में अपना करियर बनाया। वर्तमान में सागर भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण, मैसूरु में रिसर्च एसोसिएट के तौर पर कार्यरत हैं। वह लेवल-6 के अंतर्गत 37,600 रुपये के मूल वेतन पर काम कर रहे हैं। सागर कोडी की यात्रा यह दिखाती है कि लक्षित छात्रवृत्ति और फेलोशिप जैसी योजनाएं आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित समुदायों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा जारी रखने में महत्वपूर्ण सहयोग दे सकती हैं। सागर की उपलब्धि से न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि उन्हें अपने समुदाय के अन्य युवाओं को उच्च शिक्षा और शोध के लिए प्रेरित करने का अवसर भी मिला है। राष्ट्रीय फेलोशिप फॉर शेड्यूल्ड कास्ट्स (NFSC) के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सागर कोडी ने कहा कि फेलोशिप की मदद से वह बिना वित्तीय कठिनाइयों के अपनी पीएचडी पूरी कर सके। उन्होंने बताया कि इस सहायता ने उन्हें अपने शैक्षणिक लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने के साथ-साथ परिवार के भरण-पोषण में योगदान देने में भी सक्षम बनाया। सागर कोडी की कहानी गांव से शुरू होकर उच्च शिक्षा, शोध और एक पेशेवर करियर तक पहुंचने की यात्रा है। उनकी यह उपलब्धि दृढ़ संकल्प, अवसर और संस्थागत सहयोग के महत्व को सामने रखती है।Posted by/Arti Rai
यूजीसी-नेट जेआरएफ में मामूली अंतर से रह गए पीछे
परिवार की जिम्मेदारियों के बीच पीएचडी जारी रखना था चुनौतीपूर्ण
फेलोशिप से मिली आर्थिक मजबूती
पीएचडी पूरी कर बनाया शोध के क्षेत्र में करियर
सागर की कहानी बनी प्रेरणा