संवाददाता/आरती राय
नई दिल्ली:भारतीय रेलवे ने रेल यात्रियों की सुरक्षा और ट्रेनों के सुरक्षित संचालन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जानकारी दी है। रेलवे के अनुसार, ट्रैक पर अनधिकृत प्रवेश और अन्य जोखिमों को कम करने के लिए देशभर में बड़े पैमाने पर सुरक्षा बाड़ लगाने का काम किया गया है।
19,700 किलोमीटर ट्रैक पर सुरक्षा कवच
रेलवे के मुताबिक अब तक करीब 19,700 किलोमीटर रेलवे ट्रैक के किनारे सुरक्षा बाड़ लगाई जा चुकी है। बिहार, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के रेलखंड इसमें शामिल हैं।
इसका उद्देश्य रेलवे ट्रैक पर अनधिकृत आवाजाही को रोकना और ट्रेन संचालन को ज्यादा सुरक्षित बनाना है। पैदल यात्रियों के लिए बने सबवे में भी सुरक्षा बाड़ लगाने की व्यवस्था की जा रही है, ताकि ट्रैक पार करने की जरूरत कम हो।
पत्थरबाजी पर रेलवे का सख्त रुख
चलती ट्रेन पर पत्थर फेंकने की घटनाओं को रेलवे गंभीर सुरक्षा खतरे के तौर पर देखता है। ऐसे मामलों में संबंधित कानून के तहत आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
संवेदनशील इलाकों की पहचान कर वहां विशेष निगरानी बढ़ाई जाती है। शराबियों, उपद्रवी और अन्य असामाजिक तत्वों के खिलाफ भी समय-समय पर अभियान चलाए जाते हैं।
RPF और पुलिस के बीच बढ़ाया गया तालमेल
रेलवे सुरक्षा बल यानी RPF, GRP और स्थानीय पुलिस के बीच नियमित समन्वय रखा जाता है। संवेदनशील स्थानों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा कर पत्थरबाजी जैसी घटनाओं पर रोक लगाने के प्रयास किए जाते हैं।
ट्रेनों के साथ ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों और सुरक्षा दलों को भी ऐसे स्थानों पर अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं, जहां पहले इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
‘ऑपरेशन साथी’ से जागरूकता अभियान’
रेलवे ट्रैक के आसपास रहने वाले लोगों को पत्थरबाजी के खतरों और इसके गंभीर परिणामों के बारे में जानकारी देने के लिए ऑपरेशन साथी’ सहित कई जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
रेलवे का फोकस सिर्फ कार्रवाई पर नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों को जागरूक कर ऐसी घटनाओं को शुरुआत में ही रोकने पर भी है।
घटनाओं का विश्लेषण कर तैयार होती है रणनीति
रेलवे के अनुसार पत्थरबाजी की घटनाओं का विश्लेषण किया जाता है। इसके आधार पर संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा उपायों को मजबूत करने और आगे की कार्रवाई की रणनीति तैयार की जाती है।
रेल संचालन की सुरक्षा को भारतीय रेलवे ने सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है। सुरक्षा व्यवस्था की नियमित समीक्षा के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राज्य स्तरीय रेलवे सुरक्षा समितियों (SLSCR) की व्यवस्था भी की गई है।
रेलवे की सुरक्षा सिर्फ ट्रैक और ट्रेनों की निगरानी तक सीमित नहीं है। बाड़ लगाने, सुरक्षा बलों की तैनाती, पुलिस समन्वय और जन-जागरूकता अभियानों को एक साथ लागू कर रेल नेटवर्क को सुरक्षित बनाने की कोशिश की जा रही है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 12 अगस्त 2026 को लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में रेलवे की इन सुरक्षा व्यवस्थाओं की जानकारी दी।