बीकानेर हाउस में तीजोत्सव-2026 का रंगारंग समापन आज, कुतले खान की लोक-सूफी प्रस्तुतियों ने बांधा समां

राजस्थान की लोक संस्कृति, संगीत, हस्तशिल्प और पारंपरिक खानपान का दिल्ली में दिखा अनूठा संगम; क्राफ्ट मेला, पारंपरिक खेल और राजस्थानी व्यंजन बने लोगों की पहली पसंद

नई दिल्ली, 23 अगस्त।

राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति, कला, परंपराओं, हस्तशिल्प, संगीत और पारंपरिक खानपान को दिल्लीवासियों के बीच जीवंत रूप में प्रस्तुत करने वाला तीजोत्सव-2026 अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। बीकानेर हाउस, नई दिल्ली में आयोजित इस बहुरंगी उत्सव में राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत की मनमोहक झलक देखने को मिल रही है। उत्सव का समापन सोमवार को हुआ।

तीजोत्सव के दौरान आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों, पारंपरिक खेल प्रतियोगिताओं, हस्तशिल्प प्रदर्शनी, क्राफ्ट मेले और राजस्थानी व्यंजनों के फूड स्टॉल ने बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित किया। पूरे आयोजन में राजस्थान की लोक परंपराओं और आधुनिक शहर की सांस्कृतिक जीवंतता का खूबसूरत संगम देखने को मिला।

कुतले खान की लोक एवं सूफी गायकी ने जीता दिल

रविवार शाम आयोजित सांस्कृतिक संध्या तीजोत्सव-2026 का प्रमुख आकर्षण रही। जैसलमेर के प्रसिद्ध लोक गायक कुतले खान ने अपनी प्रभावशाली लोक एवं सूफी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी गायकी के दौरान बीकानेर हाउस परिसर राजस्थानी लोक संगीत की मधुर स्वर लहरियों से गूंज उठा और दर्शक देर तक संगीत की रंगीन शाम का आनंद लेते रहे।

राजस्थान पर्यटन की ओर से आयोजित इस विशेष सांस्कृतिक संध्या में लोक एवं सूफी संगीत की अनेक लोकप्रिय रचनाएं प्रस्तुत की गईं। कार्यक्रम की शुरुआत ‘केसरिया बालम’ से हुई। इसके बाद ‘झूले झूले लाल’, ‘अली मोरे अंगना दरस दिखा’, ‘छाप तिलक’, ‘सानू इक पल’, ‘ये तूने क्या किया’, ‘घूमर’ और ‘वारी जाऊं रे’ जैसी प्रस्तुतियों ने माहौल को संगीतमय बना दिया।

इसके अलावा ‘अंखियां उडीक दिया’, ‘आजा माही’, ‘पिया घर आया’, ‘नीट खैर’, ‘तू माने या ना माने’, ‘सजदा’, ‘काली काली जुल्फों’, ‘जोगी दे नाल’, ‘दम नाल दम भरांगी’, ‘सांसों की माला पे’, ‘दुल्हे का सेहरा’, ‘लाल मेरी पत’, ‘बोली प्यारी लागे’, ‘लहरियो’ सहित कई लोकप्रिय रचनाओं ने सांस्कृतिक संध्या में विविध रंग भर दिए।

‘सलामत रहे तेरी आंखों की मस्ती’, ‘सोचता हूं कि वो कितने मासूम थे’, ‘कहना गलत गलत’ और ‘दमादम मस्त कलंदर’ जैसी प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम के उत्साह को और बढ़ा दिया। लोक और सूफी संगीत के इस अनूठे मेल ने दर्शकों को राजस्थान की संगीत परंपरा के साथ-साथ भारतीय लोक-संस्कृति की व्यापक विविधता से भी जोड़ा।

दीप प्रज्वलन के साथ हुआ सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ

सांस्कृतिक संध्या का उद्घाटन केन्द्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवासन और प्रमुख आवासीय आयुक्त रोहित कुमार सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में गणमान्य व्यक्ति और संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे।

केन्द्रीय मंत्री और कई सांसदों ने देखा तीजोत्सव

रविवार को केन्द्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, सांसद पी.पी. चौधरी, राहुल कस्वां, राज्यसभा सांसद बाबूराम निषाद, गाजियाबाद के सांसद अतुल गर्ग सहित कई विशिष्ट अतिथियों ने बीकानेर हाउस पहुंचकर तीजोत्सव का अवलोकन किया।

इस दौरान राजस्थान सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, केन्द्र सरकार के आईएएस, आईपीएस एवं आईएफएस अधिकारी, नीति आयोग के सदस्य एम. श्रीनिवासन, संस्कृति सचिव विवेक , अग्रवाल, आईजीएनसीए के सदस्य सचिव, पीएमएमएल के निदेशक तथा एनडीएमसी की चेयरपर्सन सहित अनेक गणमान्य लोग भी उत्सव में शामिल हुए।

प्रमुख आवासीय आयुक्त रोहित कुमार ने गणमान्य अतिथियों का राजस्थानी साफा पहनाकर स्वागत किया और उन्हें उत्सव परिसर का भ्रमण कराया। अतिथियों ने विभिन्न स्टॉल, हस्तशिल्प प्रदर्शनी, सांस्कृतिक गतिविधियों और खानपान के केंद्रों का जायजा लिया।

हस्तशिल्प और क्राफ्ट मेले ने खींचा लोगों का ध्यान

तीजोत्सव में राजस्थान के पारंपरिक हस्तशिल्प, लोक कला और विभिन्न उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। अलग-अलग क्षेत्रों से आए शिल्पकारों और लोक कलाकारों को अपनी कला और हुनर प्रदर्शित करने का मंच मिला है। क्राफ्ट मेले में राजस्थान की पारंपरिक कला और शिल्प की विविधता देखने को मिल रही है। यहां आने वाले लोग न केवल हस्तनिर्मित वस्तुओं को देख रहे हैं, बल्कि उन्हें खरीदकर राजस्थान की कला और शिल्पकारों से जुड़ने का अवसर भी प्राप्त कर रहे हैं।

राजस्थानी व्यंजनों की खुशबू से महका बीकानेर हाउस

तीजोत्सव का एक अन्य बड़ा आकर्षण राजस्थानी खानपान के फूड स्टॉल हैं। पारंपरिक राजस्थानी व्यंजनों ने लोगों को खासा आकर्षित किया है। फूड स्टॉल पर राजस्थान के पारंपरिक स्वाद का आनंद लेने के लिए लोगों की भीड़ नजर आई।

राजस्थानी भोजन के जरिए उत्सव में आने वाले लोगों को प्रदेश की समृद्ध खानपान परंपरा और अलग-अलग क्षेत्रों के पारंपरिक स्वाद से परिचित होने का अवसर मिल रहा है।

पारंपरिक खेलों ने भी बढ़ाया उत्सव का उत्साह

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ-साथ आयोजित पारंपरिक खेल प्रतियोगिताओं ने भी तीजोत्सव को खास बनाया। इन गतिविधियों के माध्यम से राजस्थान की लोक परंपराओं और पारंपरिक मनोरंजन को नई पीढ़ी तथा दिल्लीवासियों के बीच पहुंचाने का प्रयास किया गया।

एक मंच पर दिखी राजस्थान की पूरी सांस्कृतिक तस्वीर

प्रमुख आवासीय आयुक्त रोहित कुमार ने कहा कि बीकानेर हाउस में आयोजित तीजोत्सव-2026 दिल्लीवासियों और राजस्थान से जुड़े लोगों के लिए राजस्थान की लोक संस्कृति, संगीत, कला, हस्तशिल्प और पारंपरिक खानपान को एक ही मंच पर अनुभव करने का अवसर प्रदान कर रहा है।

उन्होंने कहा कि तीजोत्सव में राजस्थान के हस्तशिल्प, लोक कला और पारंपरिक उत्पादों को विशेष स्थान दिया गया है। इससे प्रदेश के शिल्पकारों और लोक कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने और लोगों तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है।

तीजोत्सव-2026 अब अपने अंतिम पड़ाव पर है और सोमवार को इसके समापन के साथ बीकानेर हाउस में सजे राजस्थान के इस सांस्कृतिक रंगमंच का औपचारिक रूप से समापन होगा। हालांकि, आयोजन के दौरान लोक संगीत, पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और राजस्थानी व्यंजनों के माध्यम से दिल्लीवासियों को मिला राजस्थान की संस्कृति का यह अनुभव लंबे समय तक यादगार रहेगा।

Prev Post
Next Post