बीकानेर हाउस में तीजोत्सव-2026 का भव्य समापन, 10 दिन में 1.30 करोड़ रुपये से अधिक की रिकॉर्ड बिक्री

राजस्थान के हस्तशिल्प, परिधान, खानपान और लोक संस्कृति का दिखा शानदार संगम; आर्टिजंस के उत्पादों से लेकर राजस्थानी व्यंजनों तक खूब हुई खरीदारी

Reported by /Arti Rai

नई दिल्ली, 24 अगस्त।

नई दिल्ली के ऐतिहासिक बीकानेर हाउस में राजस्थान की लोक संस्कृति, हस्तशिल्प, कला, खानपान और परंपराओं को समर्पित दस दिवसीय तीजोत्सव-2026 क्राफ्ट एवं फूड मेला सोमवार को पूरे हर्षोल्लास के साथ संपन्न हो गया। दस दिनों तक चले इस भव्य आयोजन में राजस्थान के विभिन्न अंचलों से आए दस्तकारों, हस्तशिल्प कलाकारों, लोक कलाकारों और महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को दिल्लीवासियों का जबरदस्त समर्थन मिला।

इस वर्ष तीजोत्सव में आर्टिजंस, हस्तशिल्प और खानपान से जुड़े स्टॉल्स पर लगभग 1 करोड़ 30 लाख रुपये से अधिक की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की गई। मेले में पहले दिन से ही बड़ी संख्या में दर्शकों और खरीदारों की मौजूदगी रही। लोगों ने राजस्थान के पारंपरिक हस्तशिल्प, परिधान, आभूषण, घरेलू उपयोग की वस्तुओं और विभिन्न प्रकार के राजस्थानी व्यंजनों में विशेष रुचि दिखाई।

रिकॉर्ड बिक्री पर दस्तकारों और कलाकारों को बधाई

प्रमुख आवासीय आयुक्त रोहित कुमार ने तीजोत्सव में आर्टिजंस और कलाकारों के उत्पादों की रिकॉर्ड बिक्री पर उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि दस दिवसीय आयोजन के दौरान पहले दिन से ही उत्सव स्थल पर लोगों की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिली।

उन्होंने बताया कि राजस्थान के हस्तशिल्प कलाकारों द्वारा तैयार किए गए पारंपरिक उत्पादों, स्वादिष्ट राजस्थानी व्यंजनों, सांस्कृतिक संध्याओं और पारंपरिक खेल प्रतियोगिताओं ने लोगों को पूरे उत्सव के दौरान आकर्षित किया। तीजोत्सव ने न केवल राजस्थान की कला एवं संस्कृति को दिल्लीवासियों तक पहुंचाया, बल्कि प्रदेश के दस्तकारों और कलाकारों को अपने उत्पादों के लिए एक बड़ा बाजार भी उपलब्ध कराया।

RUDA के 25 स्टॉल्स पर जमकर हुई खरीदारी

RUDA के सलाहकार ओम प्रकाश ने बताया कि मेले में RUDA की ओर से राजस्थानी हस्तशिल्प और परिधानों से जुड़े 25 स्टॉल्स लगाए गए थे। इन स्टॉल्स पर प्रदर्शित पारंपरिक उत्पादों को आगंतुकों ने काफी पसंद किया और जमकर खरीदारी की।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष आयोजित दस दिवसीय मेले में बिक्री के आंकड़े काफी उत्साहजनक रहे और रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की गई। इससे राजस्थान के हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों के प्रति दिल्लीवासियों की बढ़ती पसंद का भी पता चलता है।

महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों ने भी बटोरी खूब सराहना

तीजोत्सव में राजीविका के माध्यम से दिल्ली आए महिला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी कलाकारों ने भी अपनी कला और हुनर का प्रदर्शन किया। राजीविका की अनुपमा सक्सेना ने बताया कि विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित महिला कलाकारों द्वारा मेले में 15 स्टॉल्स लगाए गए थे।

इन स्टॉल्स पर हैंडब्लॉक बेडशीट, सूट, साड़ियां, कंगन एवं ज्वैलरी, मोजड़ियां, लाख की वस्तुएं और चमड़े से बने सामान** सहित राजस्थान के अनेक पारंपरिक उत्पाद उपलब्ध रहे। आगंतुकों ने इन उत्पादों में विशेष रुचि दिखाई और बड़ी संख्या में खरीदारी की।

महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा लगाए गए राजस्थानी खानपान के स्टॉल भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे। इससे महिला कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों को अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने का अवसर मिला।

सरस के दुग्ध उत्पादों की भी रही खास मांग

इस वर्ष तीजोत्सव में सरस के दुग्ध उत्पादों को भी लोगों ने काफी पसंद किया। मेले में सरस के उत्पादों की लगभग 3 लाख रुपये से अधिक की खरीदारी हुई।

विभिन्न जिला दुग्ध संघों से प्राप्त मिठाइयों और दुग्ध उत्पादों ने भी अपनी अलग पहचान बनाई। इनमें अलवर का कलाकंद, बीकानेर के रसगुल्ले, गुलाब जामुन, गाय का घी, छाछ, लस्सी, पनीर और श्रीखंड विशेष रूप से लोगों की पसंद बने।

राजस्थानी स्वाद और पारंपरिक दुग्ध उत्पादों की उपलब्धता ने तीजोत्सव के फूड मेले को भी खास बना दिया। बड़ी संख्या में लोगों ने इन उत्पादों का स्वाद लिया और अपनी पसंद के उत्पादों की खरीदारी की।

केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों ने किया उत्सव का अवलोकन

संयुक्त आवासीय आयुक्त रिंकू मीना ने बताया कि इस वर्ष तीजोत्सव का अवलोकन केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, भागीरथ चौधरी, सांसदों, राजस्थान के मुख्य सचिव तथा भारतीय प्रशासनिक सेवा, पुलिस सेवा और वन सेवा के अधिकारियों सहित केन्द्र एवं राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने किया।

सभी विशिष्ट अतिथियों का स्वागत प्रमुख आवासीय आयुक्त रोहित कुमार ने किया। अतिथियों ने मेले में प्रदर्शित राजस्थानी हस्तशिल्प, लोक कला, परिधानों, पारंपरिक उत्पादों और खानपान का अवलोकन किया तथा राजस्थान की कला और संस्कृति के इस अनूठे संगम की सराहना की।

15 अगस्त से शुरू हुआ था तीजोत्सव

उल्लेखनीय है कि 15 अगस्त से शुरू हुए तीजोत्सव-2026 का शुभारंभ राजस्थान के प्रमुख आवासीय आयुक्त रोहित कुमार ने दीप प्रज्वलित कर किया था। दस दिनों तक चले इस उत्सव में राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत के अलग-अलग रंग देखने को मिले।

आयोजन में तीज माता की सवारी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इसके साथ ही राजस्थान के प्रसिद्ध लोक कलाकार कुतले खान की सूफी एवं राजस्थानी लोकगीतों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।

लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां

तीजोत्सव के दौरान राजस्थान के विभिन्न अंचलों से आए लोक कलाकारों ने अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदेश की लोक संस्कृति और संगीत की विविधता को मंच पर जीवंत किया। लोकगीतों, लोक संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने पूरे उत्सव के दौरान बीकानेर हाउस के माहौल को राजस्थानी रंग में रंगे रखा।

कुतले खान की लोक एवं सूफी प्रस्तुतियों के दौरान दर्शकों ने विशेष उत्साह दिखाया। राजस्थानी लोक संगीत के साथ सूफी गायकी के अनूठे मेल ने सांस्कृतिक संध्या को यादगार बना दिया।

हस्तशिल्प से लेकर खानपान तक, हर रंग रहा खास

दस दिवसीय तीजोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि यहां राजस्थान की संस्कृति के कई पहलू एक ही मंच पर देखने को मिले। हस्तशिल्प, परिधान, आभूषण, पारंपरिक कलाएं, महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद, राजस्थानी खानपान, लोक संगीत, सांस्कृतिक कार्यक्रम और पारंपरिक खेल प्रतियोगिताओं ने उत्सव को व्यापक स्वरूप दिया।

मेले ने जहां दिल्लीवासियों को राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया, वहीं प्रदेश के दस्तकारों, कलाकारों और छोटे उद्यमियों को अपने उत्पादों की बिक्री के लिए महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।

रिकॉर्ड बिक्री ने बढ़ाया कलाकारों का उत्साह

तीजोत्सव-2026 में 1 करोड़ 30 लाख रुपये से अधिक की रिकॉर्ड बिक्री को आयोजन की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। बिक्री के इस आंकड़े से दस्तकारों और कलाकारों में उत्साह बढ़ा है। वहीं, आयोजकों के अनुसार, बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने यह साबित किया कि दिल्ली में राजस्थान की पारंपरिक कला, संस्कृति और खानपान के प्रति लोगों में गहरी रुचि बनी हुई है।

दस दिनों तक राजस्थान की रंग-बिरंगी संस्कृति से सजा बीकानेर हाउस सोमवार को तीजोत्सव के समापन के साथ एक बार फिर सामान्य रूप में लौट आया, लेकिन रिकॉर्ड बिक्री, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और राजस्थान की लोक विरासत के शानदार प्रदर्शन ने तीजोत्सव-2026 को यादगार बना दिया।

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