NTA की परीक्षा व्यवस्था पर राहुल गांधी के सवाल: “गलती NTA की, सजा छात्रों को क्यों?”

UGC NET 2026 में प्रश्नपत्रों की गंभीर त्रुटियों और परीक्षा दोबारा कराने पर विपक्ष ने उठाए सवाल

नई दिल्ली: UGC NET जून 2026 की परीक्षा को लेकर राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से NTA की परीक्षा व्यवस्था, प्रश्नपत्रों में सामने आई गंभीर त्रुटियों और परीक्षा परिणाम में देरी को लेकर जवाब मांगा है।

राहुल गांधी ने सवाल उठाया है कि यदि UGC NET के English, Commerce और Sociology विषयों के प्रश्नपत्रों में factual, typographical और translation errors पाए गए, तो इन गलतियों का खामियाजा उन छात्रों को क्यों भुगतना पड़ रहा है जिन्होंने परीक्षा दी थी?

NTA की ओर से की गई समीक्षा में प्रश्नपत्रों में कई तरह की खामियां सामने आने की बात कही गई है। इनमें प्रमुख विद्वानों के नाम गलत लिखे जाने, पुस्तकों के शीर्षकों में त्रुटियां, प्रश्नों की भाषा में गलतियां, grammatical और gender-number agreement की समस्याएं, punctuation mistakes तथा स्थापित अवधारणाओं के लिए non-standard terms के इस्तेमाल जैसी शिकायतें शामिल हैं।

दो महीने बाद सामने आईं प्रश्नपत्रों की खामियां

सबसे बड़ा सवाल यह है कि UGC NET जून 2026 की परीक्षा के करीब दो महीने बाद इन गंभीर त्रुटियों का पता क्यों चला?

राहुल गांधी ने इसी मुद्दे को उठाते हुए पूछा है कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में प्रश्नपत्र तैयार करने और उसे अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में इतनी बड़ी गलतियां कैसे रह गईं।

उनका सवाल है कि जब परीक्षा लाखों युवाओं के भविष्य और करियर से जुड़ी हो, तो प्रश्नपत्र की गुणवत्ता और तथ्यात्मक शुद्धता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है?

कई प्रश्न पहले की परीक्षा में भी पूछे जा चुके थे

NTA की समिति द्वारा की गई समीक्षा में बड़ी संख्या में ऐसे प्रश्नों के दोहराए जाने की बात भी सामने आई है, जो पहले आयोजित परीक्षा में पूछे जा चुके थे।

ऐसे में परीक्षा की विश्वसनीयता और प्रश्नपत्र तैयार करने की पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

9 और 10 सितंबर को फिर होगी परीक्षा

English, Commerce और Sociology विषयों के अभ्यर्थियों के लिए अब परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी।इन तीन विषयों की परीक्षा 9 और 10 सितंबर को प्रस्तावित है।

लेकिन अभ्यर्थियों की चिंता केवल दोबारा परीक्षा देने तक सीमित नहीं है। सवाल यह भी है कि दोबारा परीक्षा के कारण परिणाम में देरी होगी और इसका असर विश्वविद्यालयों में प्रवेश तथा अन्य अकादमिक अवसरों पर पड़ सकता है।

छात्रों के नुकसान की भरपाई कौन करेगा?

राहुल गांधी ने सरकार से यह सवाल भी पूछा है कि अगर परीक्षा परिणाम में देरी के कारण किसी छात्र को इस साल के शैक्षणिक सत्र में विश्वविद्यालय में प्रवेश नहीं मिल पाता है, तो उसके नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा?

UGC NET के परिणाम से कई छात्रों के लिए JRF, Assistant Professor eligibility और PhD admission जैसे महत्वपूर्ण अवसर जुड़े होते हैं।

ऐसे में परिणाम में होने वाली प्रत्येक देरी छात्रों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।

राहुल गांधी के प्रमुख सवाल

1. NTA की गलती की सजा देश के छात्रों को क्यों भुगतनी पड़े?

2. प्रश्नपत्र में इतनी गंभीर गलतियों का पता लगाने में करीब दो     महीने क्यों लग गए?

3. प्रश्नपत्र तैयार करने और मंजूर करने की प्रक्रिया में इतनी बड़ी   चूक कैसे हुई?

4. दोबारा परीक्षा के कारण जिन छात्रों का अकादमिक सत्र प्रभावित होगा, उनके नुकसान की भरपाई कौन करेगा?

5. राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में लापरवाही की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

6. 84 अन्य विषयों में परीक्षा दे चुके अभ्यर्थियों के परिणाम में देरी क्यों हो रही है?

7. लाखों युवाओं के करियर से जुड़ी परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय क्यों नहीं की जा रही?

84 अन्य विषयों के अभ्यर्थियों का भी सवाल

राहुल गांधी ने केवल उन तीन विषयों के छात्रों का मुद्दा नहीं उठाया जिनकी परीक्षा दोबारा होने जा रही है। उन्होंने 84 अन्य विषयों में परीक्षा दे चुके हजारों अभ्यर्थियों के परिणाम में देरी पर भी सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है।

जून में परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी अब परिणाम का इंतजार कर रहे हैं। उनके लिए परिणाम केवल एक परीक्षा का नतीजा नहीं, बल्कि आगे की पढ़ाई और करियर से जुड़े कई अवसरों का रास्ता है।

“देश का युवा जवाब चाहता है”

राहुल गांधी ने सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से NTA की जवाबदेही को लेकर स्पष्ट जवाब देने की मांग की है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं में मेहनत, अनुशासन और समय की अहमियत समझाई जाती है, तो परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी की गंभीर चूक की कीमत अभ्यर्थियों को क्यों चुकानी पड़े?

अब निगाहें सरकार और NTA की अगली कार्रवाई पर हैं। छात्रों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि **परीक्षा व्यवस्था में हुई चूक की जिम्मेदारी तय होगी या एक बार फिर उसका बोझ अभ्यर्थियों पर ही पड़ेगा?

🔴 BIG QUESTION

“जब गलती प्रश्नपत्र बनाने वाली व्यवस्था की है, तो परीक्षा दोबारा देने की कीमत छात्र क्यों चुकाएं?”

UGC NET के अभ्यर्थी अब केवल परीक्षा की तारीख नहीं, बल्कि समय पर परिणाम, पारदर्शी प्रक्रिया और अपनी मेहनत के साथ न्याय की मांग कर रहे हैं।

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