संवाददाता / आरती राय
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा का तीन दिवसीय मानसून सत्र विधायी कामकाज के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहा। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि सत्र के दौरान 19 CAG रिपोर्ट सदन में पेश की गईं और चार महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए। कुल 13 घंटे 19 मिनट तक सदन की कार्यवाही चली।
नियम 280 के तहत विधायकों ने 52 जनहित के मुद्दे उठाए। सामान्य तौर पर प्रतिदिन 10 सदस्यों को मुद्दे उठाने का अवसर मिलता है, लेकिन इस सत्र में एक दिन में 23 सदस्यों को बोलने का मौका दिया गया।
अध्यक्ष ने बताया कि मौजूदा 8वीं दिल्ली विधानसभा ने करीब डेढ़ साल से भी कम समय में छह सत्र आयोजित किए हैं, जबकि पिछली 7वीं विधानसभा के पांच साल के कार्यकाल में केवल पांच सत्र हुए थे।
सदन में कूड़ा निस्तारण, जलभराव, आवारा पशु, PWD की सड़कों और बिजली बिल जैसे प्रमुख नागरिक मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके अलावा उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों और सजा के मुद्दे पर दो दिवसीय अल्पकालिक चर्चा भी हुई।
चार महत्वपूर्ण विधेयक पारित
विधानसभा में AI तकनीक की नई शुरुआत
दिल्ली विधानसभा में AI आधारित BHASHINI लाइव ट्रांसक्रिप्शन और अनुवाद प्रणाली का पायलट आधार पर शुभारंभ किया गया।
इसे देश की किसी विधायी संस्था में इस तरह का पहला पायलट बताया गया है। इससे सदन की कार्यवाही को अधिक तकनीक-सक्षम और समावेशी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है।
CAG रिपोर्ट पर कार्रवाई के निर्देश में अध्यक्ष ने बताया कि 19 CAG रिपोर्ट संबंधित सरकारी विभागों को Action Taken Notes (ATNs) के लिए भेजी गई हैं। उन्होंने रिपोर्टों पर समयबद्ध कार्रवाई कर उन्हें जल्द तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने पर जोर दिया।
वहीं, सदन में विपक्ष के कुछ सदस्यों के कथित हंगामे और अमर्यादित आचरण पर अध्यक्ष ने नाराजगी जताई। उन्होंने सदन में वस्तुएं फेंकने, अभद्र भाषा के इस्तेमाल और मार्शलों के हस्तक्षेप जैसी घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए संसदीय मर्यादा बनाए रखने की अपील की।
अध्यक्ष ने कहा कि विधानसभा सचिवालय पारदर्शिता, मीडिया को समय पर जानकारी उपलब्ध कराने और सदन की कार्यवाही को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए प्रतिबद्ध है।