कोलकाता में रेलटेल का अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन, हिंदी के प्रगतिशील प्रयोग और भाषाई विविधता पर जोर

 ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता और राजभाषा’ से लेकर दैनिक कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के इस्तेमाल तक हुई व्यापक चर्चा; हिंदी के साथ सभी भारतीय भाषाओं के सम्मान का संदेश

Reported by/ArtiRai

कोलकाता। रेलटेल कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की ओर से राजभाषा हिंदी के प्रभावी एवं प्रगतिशील प्रयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कोलकाता में अखिल भारतीय राजभाषा हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने, राजभाषा के क्षेत्र में उभरते अवसरों एवं चुनौतियों पर विचार-विमर्श करने तथा तकनीक के बदलते दौर में हिंदी की भूमिका को लेकर विशेषज्ञों और अधिकारियों ने अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम के दौरान हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग के साथ-साथ भारत की भाषाई विविधता और सभी भारतीय भाषाओं के समान सम्मान की आवश्यकता पर भी विशेष जोर दिया गया। सम्मेलन ने रेलटेल में राजभाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के प्रगतिशील इस्तेमाल को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश दिया।

राष्ट्रगीत, दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ शुभारंभ

अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का शुभारंभ राष्ट्रगीत, दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इसके बाद रेलटेल पूर्वी क्षेत्र के प्रधान कार्यकारी निदेशक श्री जाकिर हुसैन सिद्दीकी ने उद्घाटन संबोधन दिया।

उन्होंने राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार और प्रभावी प्रयोग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के उपयोग को निरंतर बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उन्होंने रेलटेल में हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने के लिए किए जा रहे विभिन्न प्रयासों और राजभाषा संबंधी गतिविधियों को भी रेखांकित किया।

इस अवसर पर रेलटेल की राजभाषा गतिविधियों एवं उपलब्धियों पर एक विशेष प्रस्तुति दी गई। साथ ही राजभाषा पत्रिका ‘तविशी’ के विशेषांक का विमोचन भी किया गया।

स्वरचित कविता ने बांधा समां

सम्मेलन के दौरान रेलटेल के निदेशक/पीओएम श्री मनोज टंडन ने अपनी स्वरचित कविता का पाठ किया। उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम में साहित्यिक रंग भर दिया और उपस्थित लोगों ने इसे सराहा।

वहीं, नराकास के सदस्य सचिव श्री राजेश बी. नायर ने राजभाषा हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए रेलटेल की ओर से किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने हिंदी के प्रभावी इस्तेमाल और राजभाषा संबंधी गतिविधियों को आगे बढ़ाने के महत्व पर भी विचार व्यक्त किए।

गैर-हिंदी भाषी क्षेत्रों के कर्मचारियों को हिंदी सीखने के लिए प्रोत्साहन

रेलटेल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री संजय कुमार ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए विशेष रूप से गैर-हिंदी भाषी क्षेत्रों से आने वाले कर्मचारियों को हिंदी सीखने और दैनिक कार्यालयीन कार्यों में इसका प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि हिंदी का प्रयोग केवल एक निर्धारित औपचारिक प्रक्रिया तक सीमित न रहकर कार्य संस्कृति का हिस्सा बनना चाहिए। साथ ही उन्होंने सभी भारतीय भाषाओं के समान सम्मान की आवश्यकता को रेखांकित किया।

उनके संबोधन में यह संदेश प्रमुख रहा कि भारत की भाषाई विविधता उसकी महत्वपूर्ण सांस्कृतिक ताकत है और हिंदी को बढ़ावा देने के साथ-साथ देश की अन्य भारतीय भाषाओं का सम्मान भी समान रूप से आवश्यक है।

हिंदी को दैनिक व्यवहार का स्वाभाविक हिस्सा बनाने पर जोर

सम्मेलन के मुख्य अतिथि एवं मेट्रो रेलवे के महाप्रबंधक श्री प्रेम सागर गुप्ता ने हिंदी के व्यवहारिक प्रयोग पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि हिंदी का प्रयोग केवल औपचारिक अवसरों या सरकारी कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे दैनिक जीवन और व्यवहार का स्वाभाविक हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने हिंदी के सहज और नियमित प्रयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि भाषा तभी व्यापक रूप से प्रभावी बनती है, जब उसका इस्तेमाल सामान्य व्यवहार और रोजमर्रा के कार्यों में सहज रूप से किया जाए।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और राजभाषा’ पर विशेष व्याख्यान

सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण सत्र “कृत्रिम बुद्धिमत्ता और राजभाषा: अवसर, चुनौतियाँ एवं भविष्य” विषय पर केंद्रित रहा।

इस विषय पर श्री बालेन्दु शर्मा ‘दाधीच’, सीईओ, एआईएलजीओ टेक्नोलॉजीज, दुबई ने विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तेजी से बढ़ते प्रभाव और भाषा के क्षेत्र में इसके संभावित उपयोग तथा चुनौतियों पर विचार साझा किए।

तकनीक के बदलते दौर में भाषा के विकास, डिजिटल माध्यमों में हिंदी की बढ़ती भूमिका और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जरिए राजभाषा के प्रयोग को अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाओं पर चर्चा ने सम्मेलन को समसामयिक संदर्भ प्रदान किया।

विशेषज्ञों ने राजभाषा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर रखे विचार

सम्मेलन में डॉ. बरुण कुमार और प्रो. अमर पाल शर्मा ने भी राजभाषा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए।

विशेषज्ञों ने हिंदी के प्रगतिशील प्रयोग, भाषा के व्यवहारिक स्वरूप, कार्यालयीन कार्यों में हिंदी की उपयोगिता तथा बदलती तकनीकी परिस्थितियों में राजभाषा के सामने मौजूद अवसरों और चुनौतियों पर चर्चा की।

समाचार वाचन और हिंदी प्रश्नोत्तरी ने बढ़ाई सहभागिता

सम्मेलन को केवल व्याख्यान और संबोधनों तक सीमित न रखते हुए कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए समाचार वाचन एवं हिंदी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया।

इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से प्रतिभागियों को हिंदी भाषा के ज्ञान, अभिव्यक्ति क्षमता और सामान्य जागरूकता को प्रदर्शित करने का अवसर मिला। कार्यक्रम में कर्मचारियों की भागीदारी ने सम्मेलन को और अधिक संवादात्मक एवं सहभागितापूर्ण बनाया।

हिंदी के साथ भाषाई विविधता के सम्मान का संदेश

अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन ने यह संदेश भी स्पष्ट किया कि हिंदी को बढ़ावा देना भारत की अन्य भाषाओं के महत्व को कम करना नहीं, बल्कि देश की समृद्ध भाषाई परंपरा के साथ हिंदी के प्रभावी प्रयोग को आगे बढ़ाना है।

सम्मेलन में हिंदी के प्रगतिशील प्रयोग, ज्ञान-साझाकरण और भारत की भाषाई विविधता के सम्मान के प्रति रेलटेल की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ किया गया।

कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों, विशेषज्ञों और प्रतिभागियों के विचारों ने यह रेखांकित किया कि बदलते तकनीकी और प्रशासनिक परिवेश में हिंदी को अधिक सहज, व्यवहारिक और आधुनिक माध्यम के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर प्रयास जरूरी हैं।

राजभाषा के क्षेत्र में नई संभावनाओं की ओर बढ़ता रेलटेल

कोलकाता में आयोजित यह अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन रेलटेल की राजभाषा संबंधी गतिविधियों को व्यापक मंच देने के साथ-साथ कर्मचारियों के बीच हिंदी के प्रयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर बना।

तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कार्यालयीन कार्य, साहित्य, प्रतियोगिताओं और भाषाई विविधता  जैसे विभिन्न विषयों को एक मंच पर लाकर सम्मेलन ने हिंदी के भविष्य और उसके प्रगतिशील प्रयोग को लेकर व्यापक संवाद को आगे बढ़ाया।

रेलटेल का यह आयोजन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया, जिसमें हिंदी के प्रभावी प्रयोग के साथ भारत की सभी भाषा

ओं के सम्मान और भाषाई विविधता को बनाए रखने** का संदेश प्रमुखता से उभरा।

Prev Post
Next Post