ईटानगर। उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने बुधवार को अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर के चिम्पू स्थित डोनी-पोलो मिशन स्कूल का दौरा किया, जो सुनने, देखने और बौद्धिक रूप से अक्षम बच्चों के लिए समर्पित एक प्रमुख शिक्षण संस्थान है। इस दौरान उन्होंने छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों से संवाद किया तथा संस्थान की विभिन्न गतिविधियों का अवलोकन किया।
दिव्यांग छात्रों द्वारा प्रस्तुत ‘वंदे मातरम’ के भावपूर्ण गायन ने उपराष्ट्रपति को गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि छात्रों की प्रस्तुति में देशभक्ति की सच्ची भावना झलक रही थी और यह अनुभव उनके लिए अत्यंत भावुक कर देने वाला रहा।
छात्रों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने प्रेरणादायक संदेश देते हुए कहा, “कभी भी किसी को अपने सपनों की सीमा तय न करने दें। हर व्यक्ति अनोखा होता है और हर किसी में प्रतिभा होती है।” उन्होंने छात्रों से बड़े सपने देखने, आत्मविश्वास बनाए रखने और कठिन परिश्रम करने का आह्वान किया। उन्होंने दिव्यांग उद्यमी श्रीकांत बोला के जीवन का उदाहरण देते हुए चुनौतियों को अवसर में बदलने की प्रेरणा दी।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि डोनी-पोलो मिशन स्कूल जैसे संस्थान केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि बच्चों को आशा, सम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का मार्ग भी प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे संस्थान ‘विकसित भारत @2047’ के समावेशी लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए श्री राधाकृष्णन ने कहा कि डिजिटल उपकरण और सहायक तकनीकें शिक्षा को अधिक सुलभ और व्यक्तिगत बनाने में मदद कर सकती हैं। उन्होंने मिशन द्वारा एआई आधारित शिक्षण सामग्री विकसित करने के प्रयासों की सराहना की।
उपराष्ट्रपति ने शिक्षकों, पुनर्वास विशेषज्ञों और कर्मचारियों की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों के विकास में उनका धैर्य, समर्पण और करुणा अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने माता-पिता की भूमिका को भी सराहा, जो बच्चों को निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम में अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) कैवल्य त्रिविक्रम परनायक, मुख्यमंत्री पेमा खांडू, उपमुख्यमंत्री चौना मेन, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा जनजातीय मामलों के मंत्री कोंटो जिनी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

इससे पहले उपराष्ट्रपति ने ईटानगर स्थित जे. एन. राज्य संग्रहालय का भी दौरा किया और अरुणाचल प्रदेश तथा पूर्वोत्तर की समृद्ध सांस्कृतिक और मानव जातीय विरासत को संरक्षित करने में इसकी भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि संग्रहालय नई पीढ़ी और सांस्कृतिक परंपराओं के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का कार्य करते हैं और स्थानीय विरासत के प्रति गर्व की भावना को मजबूत बनाते हैं।