Binod Singh Takiyawala
नई दिल्ली। दिल्ली-NCR की जहरीली होती हवा को साफ करने की दिशा में केंद्र सरकार ने पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले भारी वाहनों को सड़क से हटाने की बड़ी पहल शुरू की है। PARIVARTAN योजना के तहत दिल्ली और NCR के हरियाणा, राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश के जिलों में पंजीकृत 2 लाख से अधिक पुराने ट्रकों और बसों को नए BS-VI या इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए ₹9,585 करोड़ का वित्तीय प्रावधान किया है। योजना के तहत वाहन मालिकों को नए वाहन खरीदने के लिए ब्याज में राहत, रोड टैक्स और पंजीकरण शुल्क में छूट तथा वाहन निर्माताओं की ओर से निर्धारित डिस्काउंट जैसे कई आर्थिक प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।
दिल्ली-NCR में प्रदूषण के लिए परिवहन क्षेत्र एक महत्वपूर्ण कारण है। सरकारी आकलन के मुताबिक परिवहन क्षेत्र का योगदान PM2.5 में करीब 14%, कार्बन मोनोऑक्साइड में 40% और नाइट्रोजन ऑक्साइड में लगभग 63% है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ट्रक और बसें कुल वाहन बेड़े का लगभग 3 प्रतिशत होने के बावजूद PM2.5 उत्सर्जन में उनकी हिस्सेदारी करीब 36 प्रतिशत बताई गई है।
यानी संख्या कम, लेकिन प्रदूषण में योगदान काफी ज्यादा।
पुराने भारी वाहनों की स्थिति और गंभीर मानी गई है। सरकारी आकलन के अनुसार एक प्री-BS भारी वाहन से होने वाला उत्सर्जन लगभग 14 BS-VI वाहनों के बराबर हो सकता है, जबकि BS-IV वाहन BS-VI वाहन की तुलना में करीब 2.7 गुना अधिक उत्सर्जन करता है।
PARIVARTAN योजना का उद्देश्य सिर्फ पुराने वाहन हटाना नहीं, बल्कि वाहन मालिकों के लिए नया वाहन खरीदना आर्थिक रूप से आसान बनाना भी है।
योजना के तहत पात्र वाहन मालिकों को:
इस तरह सरकार ने पुराने वाहन को बदलने की लागत को कई स्तरों पर कम करने की कोशिश की है।
योजना में BS-VI के साथ इलेक्ट्रिक वाहनों को भी बढ़ावा दिया गया है। दिल्ली में कुछ वाहन श्रेणियों के लिए इलेक्ट्रिक विकल्प को विशेष प्राथमिकता दी गई है।
हल्के मालवाहक वाहनों के लिए इलेक्ट्रिक वाहन अनिवार्य विकल्प रखा गया है, जबकि बसों के लिए BS-VI CNG या इलेक्ट्रिक वाहन का विकल्प दिया गया है।
इससे संकेत मिलता है कि दिल्ली में प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए सरकार कुछ श्रेणियों में स्वच्छ तकनीक की ओर तेजी से बदलाव चाहती है।
पुराने वाहन को सिर्फ दिल्ली-NCR से हटाकर दूसरे शहर में चलाने से प्रदूषण की समस्या खत्म नहीं होगी। इसी वजह से योजना में स्क्रैपिंग व्यवस्था को भी जोड़ा गया है।
BS-III और उससे पुराने वाहनों को पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग सुविधा केंद्र में स्क्रैप करना अनिवार्य होगा।
वहीं BS-IV वाहनों के मामले में स्क्रैपिंग अथवा NCR से बाहर गैर-NCAP शहरों या कस्बों में बिक्री का विकल्प दिया गया है।
PARIVARTAN योजना को सफल बनाने के लिए सरकार ने वित्तीय संस्थानों और ऑटोमोबाइल कंपनियों को भी साथ जोड़ा है।
अब तक 42 बैंक और NBFC योजना से जुड़ चुके हैं। इसके अलावा 15 ऑटोमोबाइल कंपनियों ने पात्र वाहन मालिकों को निर्धारित छूट देने के लिए समझौते किए हैं।
19 अगस्त को राजस्थान के अलवर में महेंद्र सिंह ने PARIVARTAN योजना के तहत पहला नया वाहन खरीदा।
हालांकि, यह शुरुआत प्रतीकात्मक है, लेकिन सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इस प्रक्रिया को हजारों और फिर लाखों वाहन मालिकों तक पहुंचाने की है।
27 अगस्त तक योजना के पोर्टल पर 1,300 से अधिक लाभार्थी पंजीकरण करा चुके हैं।
वहीं योजना का लक्ष्य लगभग 2.07 लाख पुराने ट्रकों और बसों को बदलना है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इनमें लगभग:
इस लिहाज से अभी योजना को अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी है।
PARIVARTAN की सफलता सिर्फ पोर्टल पर हुए रजिस्ट्रेशन से तय नहीं होगी।
असली सवाल यह होगा कि:
कितने पुराने ट्रक और बसें वास्तव में सड़क से हटे?
कितने नए BS-VI और इलेक्ट्रिक वाहन सड़कों पर आए?
और सबसे अहम—दिल्ली-NCR की हवा की गुणवत्ता में कितना सुधार हुआ?
सरकार ने वाहन मालिकों तक योजना की जानकारी पहुंचाने के लिए पेट्रोल पंप, ट्रांसपोर्ट नगर, टोल प्लाजा और RTO कार्यालयों तक जागरूकता अभियान पहुंचाने की कोशिश शुरू की है।
दो लाख से ज्यादा पुराने वाहनों को बदलना आसान नहीं होगा। छोटे ट्रांसपोर्टरों की आर्थिक क्षमता, बैंक लोन की शर्तें, नए वाहनों की उपलब्धता, स्क्रैपिंग सुविधाएं और विभिन्न राज्यों के विभागों के बीच समन्वय जैसे कई मुद्दे महत्वपूर्ण होंगे।
इसके अलावा दिल्ली-NCR का प्रदूषण केवल वाहनों से नहीं है। पराली, धूल, निर्माण गतिविधियां, औद्योगिक प्रदूषण, मौसम और परिवहन जैसे कई कारक भी इसके लिए जिम्मेदार हैं।
इसलिए प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में PARIVARTAN एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है, लेकिन अकेले इससे पूरी समस्या का समाधान संभव नहीं होगा।
मुख्य बिंदु