राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रो. शिवानी वी. को प्रदान किया राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026, संस्कृत को आधुनिक तकनीक से जोड़ने में दिया महत्वपूर्ण योगदान

पाणिनीय व्याकरण, कंप्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स और AI के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए मिला राष्ट्रीय सम्मान; संस्कृत विषय से सम्मान पाने वाली एकमात्र शिक्षाविद्

Reported by/ Arti Rai

नई दिल्ली। संस्कृत शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली कर्नाटक संस्कृत विश्वविद्यालय, बेंगलुरु की प्रो. शिवानी वी. को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 से सम्मानित किया गया है। शिक्षक दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रो. शिवानी वी. को यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया।

इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी, शिक्षा एवं कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री जयंत चौधरी, शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार सहित शिक्षा जगत और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सम्मान के रूप में प्रो. शिवानी वी. को प्रशस्ति-पत्र और रजत पदक प्रदान किया गया।

संस्कृत विषय से राष्ट्रीय सम्मान पाने वाली एकमात्र शिक्षाविद्

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 के लिए उच्च शिक्षा संस्थानों एवं पॉलिटेक्निक श्रेणी में देशभर से चयनित शिक्षकों में प्रो. शिवानी वी. संस्कृत विषय से सम्मानित होने वाली एकमात्र शिक्षाविद् हैं। उनका चयन शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट अध्यापन, शोध, नवाचार, अकादमिक नेतृत्व तथा समाजोपयोगी कार्यों में उनके विशिष्ट योगदान को देखते हुए किया गया।

प्रो. शिवानी वी. लंबे समय से संस्कृत व्याकरण और पाणिनीय ज्ञान परंपरा के अध्ययन-अध्यापन के साथ-साथ उसे आधुनिक तकनीकी संसाधनों से जोड़ने की दिशा में कार्य कर रही हैं। उनके प्रयासों ने संस्कृत को केवल पारंपरिक अध्ययन की भाषा के रूप में देखने के बजाय आधुनिक शोध और तकनीकी अनुप्रयोगों के लिए भी महत्वपूर्ण बनाया है।

पाणिनीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का प्रयास

प्रो. शिवानी वी. संस्कृत व्याकरण की विशेषज्ञ हैं और उन्होंने पाणिनीय व्याकरण एवं ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया है। विशेष रूप से कंप्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स (Computational Linguistics), नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में संस्कृत की संभावनाओं पर उनका कार्य उल्लेखनीय रहा है।

उनके अकादमिक प्रयासों का उद्देश्य संस्कृत के विशाल ज्ञान-साहित्य को डिजिटल तकनीक के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाना और आधुनिक शोध के लिए उसका उपयोग बढ़ाना है। संस्कृत की व्याकरणिक संरचना, भाषायी विश्लेषण और डिजिटल संसाधनों के विकास के क्षेत्र में उनके कार्य को विशेष महत्व मिला है।

IIT और IIM जैसे संस्थानों के साथ अंतर्विषयक परियोजनाओं को बढ़ावा

वर्तमान में प्रो. शिवानी वी. शास्त्र संकाय की अधिष्ठाता एवं व्याकरण विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पारंपरिक संस्कृत अध्ययन को आधुनिक विषयों से जोड़ते हुए अंतर्विषयक अकादमिक सहयोग को भी बढ़ावा दिया है।

उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में IIT और IIM जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ अंतर्विषयक अकादमिक परियोजनाओं को गति मिली है। इन प्रयासों के माध्यम से संस्कृत अध्ययन को कंप्यूटर विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भाषा प्रौद्योगिकी और अन्य आधुनिक विषयों के साथ जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

डिजिटल परियोजनाओं के जरिए भारतीय ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की पहल

प्रो. शिवानी वी. के मार्गदर्शन में विकसित कई डिजिटल परियोजनाएं भारतीय ज्ञान परंपरा और शास्त्रीय भाषाओं को आधुनिक डिजिटल माध्यमों से जोड़ने का कार्य कर रही हैं।

इनमें महाकोश, आयुःसंस्कृतम् और सांगणिकपाली जैसी परियोजनाएं उल्लेखनीय हैं। इन परियोजनाओं के माध्यम से संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े ज्ञान-संसाधनों को डिजिटल स्वरूप प्रदान करने तथा विद्यार्थियों, शोधार्थियों और नई पीढ़ी के लिए उन्हें अधिक सुलभ बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

इन पहलों का उद्देश्य पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने के साथ-साथ आधुनिक तकनीक के माध्यम से उसका व्यापक उपयोग सुनिश्चित करना है।

संस्कृत शिक्षा में नवाचार और तकनीकी दृष्टिकोण

प्रो. शिवानी वी. का योगदान केवल कक्षा में अध्यापन तक सीमित नहीं रहा है। उन्होंने संस्कृत शिक्षा को आधुनिक समय की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने पर विशेष जोर दिया है। उनके शोध और अकादमिक गतिविधियों में भाषा प्रौद्योगिकी, डिजिटल ह्यूमैनिटीज, कंप्यूटेशनल अध्ययन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे नए क्षेत्रों के साथ संस्कृत के संबंधों को प्रमुखता दी गई है।

उनके कार्यों से यह संदेश भी सामने आता है कि भारतीय शास्त्रीय भाषाओं और प्राचीन ज्ञान परंपराओं को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर शिक्षा और अनुसंधान के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मिलने पर बधाइयों का दौर

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 से सम्मानित होने पर प्रो. शिवानी वी. को विभिन्न शिक्षाविदों, संस्कृत प्रेमियों और अकादमिक जगत से जुड़े लोगों ने बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी, कुलसचिव प्रो. आर. जी. मुरलीकृष्ण, प्रो. मधुकेश्वर भट्ट सहित अनेक संस्कृत अनुरागियों ने प्रो. शिवानी वी. को इस राष्ट्रीय उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

उन्होंने प्रो. शिवानी वी. के सम्मान को संस्कृत शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए उनके भविष्य के अकादमिक एवं शोध कार्यों के लिए शुभकामनाएं दीं।

संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि

प्रो. शिवानी वी. को मिला राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। पारंपरिक पाणिनीय व्याकरण और आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों के बीच सेतु बनाने के उनके प्रयासों ने संस्कृत के अध्ययन को नई दिशा देने का कार्य किया है।

उनका कार्य यह दर्शाता है कि संस्कृत, आधुनिक कंप्यूटेशनल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भाषा प्रौद्योगिकी के बीच व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। राष्ट्रीय स्तर पर मिला यह सम्मान न केवल प्रो. शिवानी वी. के व्यक्तिगत योगदान की पहचान है, बल्कि संस्कृत शिक्षा, शोध और भारतीय ज्ञान परंपरा के आधुनिक विस्तार के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Prev Post
Next Post