खड़ा मैं अकेला, देखता तरक्की अपने भारत की
तिलक मार्ग पर एक फ्रेम में दिखा बीता कल, आज और आने वाला कल—विरासत के साथ आगे बढ़ते भारत की तस्वीर
The Bharat Live- सितंबर 03, 2026 03:38 AM IST
Reported by/ Aarci
नई दिल्ली | तिलक मार्ग
तिलक मार्ग पर विकास की बदलती तस्वीर अपने आप में एक कहानी कहती है। एक ओर वर्षों से खड़ी भारत के एक महापुरुष की प्रतिमा, और दूसरी ओर तेजी से आकार लेता सुप्रीम कोर्ट एक्सटेंशन भवन—यह दृश्य अतीत और भविष्य के बीच एक सुंदर संवाद जैसा प्रतीत होता है।
प्रतिमा मानो निःशब्द खड़ी होकर देश की प्रगति को निहार रही है। सामने आधुनिक निर्माण, पीछे हरियाली और ऊपर आसमान में उठती क्रेन—सब मिलकर उस भारत की तस्वीर पेश करते हैं जो अपनी विरासत को साथ लेकर निरंतर आगे बढ़ रहा है।
“मैं खड़ा हूँ अकेला,
देख रहा हूँ तरक्की अपने भारत की।
बीते कल की यादों से,
सजते आज और सुनहरे कल की।”
यह तस्वीर केवल एक निर्माण स्थल का दृश्य नहीं, बल्कि भारत के बदलते स्वरूप, विकास और विरासत के साथ आगे बढ़ते कदमों का प्रतीक है।
इस तस्वीर की सबसे खास बात यही है कि इसमें तीनों समय एक साथ दिखाई देते हैं—बीता कल, आज और आने वाला कल।
प्रतिमा बीते कल की यादों और विरासत का प्रतीक बनकर खड़ी है। निर्माणाधीन भवन वर्तमान में जारी विकास कार्यों की कहानी कह रहा है। वहीं आसमान की ओर बढ़ती क्रेन आने वाले कल की संभावनाओं का संकेत देती नजर आती है।
यह दृश्य मानो कह रहा हो कि देश आगे बढ़ता रहे, लेकिन अपनी जड़ों और इतिहास को साथ लेकर।
“मैं खड़ा हूँ अकेला,
देख रहा हूँ तरक्की अपने भारत की।
बीते कल की यादों से,
सजते आज और सुनहरे कल की।”
इन पंक्तियों में उस तस्वीर की पूरी कहानी समाई हुई है। प्रतिमा भले ही निःशब्द हो, लेकिन उसके सामने बदलता दिल्ली का परिदृश्य बहुत कुछ कह रहा है।
जहां कभी किसी स्थान की पहचान केवल इतिहास से जुड़ी होती थी, वहीं आज उसी स्थान के आसपास आधुनिक भारत की नई संरचनाएं आकार ले रही हैं। यह बदलाव केवल शहर की शक्ल बदलने का संकेत नहीं, बल्कि समय के साथ बदलते भारत की तस्वीर भी पेश करता है।
नई दिल्ली का तिलक मार्ग हमेशा से महत्वपूर्ण स्थानों में शामिल रहा है। यहां इतिहास, प्रशासन, न्याय व्यवस्था और राजधानी की आधुनिक पहचान एक-दूसरे के बेहद करीब दिखाई देती है। ऐसे में इस मार्ग पर विकास और विरासत का यह संगम अपने आप में खास मायने रखता है।
एक तरफ वर्षों से खड़ी प्रतिमा लोगों को इतिहास की याद दिलाती है, तो दूसरी ओर निर्माणाधीन सुप्रीम कोर्ट एक्सटेंशन भवन आने वाले समय की जरूरतों और संभावनाओं को दर्शाता है।
शायद यही दिल्ली की खूबसूरती है—यहां इतिहास केवल किताबों में नहीं मिलता, बल्कि आधुनिकता के बीच भी दिखाई देता है। पुरानी यादें और नई इमारतें एक साथ खड़ी होकर शहर की बदलती कहानी सुनाती हैं।
— तिलक मार्ग से एक तस्वीर, जो बहुत कुछ कहती है।
एक तस्वीर जिसमें विरासत भी है, विकास भी है और आने वाले सुनहरे कल की उम्मीद भी।